1 एनइपी से संस्कृति और सफलता दोनों से जुड़ रहे हैं छात्र : शोभा - the opinion times

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एनइपी से संस्कृति और सफलता दोनों से जुड़ रहे हैं छात्र : शोभा

 गाजियाबाद। नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने छात्रों को मातृभाषा के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों के साथ गहरे तौर पर जोड़ा है। साथ ही इससे वैश्विक स्तर पर छात्रों को बड़ी सफलता भी मिल रही है। ये बातें केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, वायुसेना स्थल, हिंडन में नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की तीसरी वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या शोभा शर्मा ने कहीं। उन्होंने कहा कि एनइपी 2020 से छात्रों की रचनात्मकता का विकास हुआ है। छात्र अब अध्ययन के साथ कौशल विकास और अपनी रचनात्मक अभिरुचियों में उत्साह के साथ हिस्सा ले रहे हैं। 

इस कार्यक्रम में डीएवी स्कूल के प्राचार्य मनोज ठाकुर और डीआईओएस रुचि ने भी हिस्सा लिया। इस मौके पर कई शिक्षाविदों और शिक्षकों की उपस्थिति में छात्रों ने एनइपी को लेकर अपने अनुभव सुनाए। इस अवसर पर शोभा शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने भारत में शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। इसमें तकनीकी शिक्षा पर बल देने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत और धरोहर से बच्चों को जोड़ने की बात की गई है। उन्होंने नई शिक्षा नीति से बच्चों में रचनात्मकता के विकास को एक बड़ी उपलब्धि बताया। 
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, वायु सेना स्थल हिंडन की प्राचार्या ने कहा कि उनका विद्यालय एनइपी से जुड़े मानदंडों और सुझावों को अपने शिक्षण से मौलिक तौर पर जोड़ने में अग्रणी रहा है। इस कारण विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर प्रशस्ति भी हुई है। 
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोज ठाकुर ने बताया कि एनइपी में रटने के बजाय अनुभवात्मक शिक्षा पर बल दिया गया है, जो विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती रुचि ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अनुपालन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ‘निपुण’ जैसे कार्यक्रमों को प्रदेश में विधिवत रूप से संचालित किया जा रहा है। 
इस अवसर पर उपस्थित मीडियाकर्मियों ने छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत और परिसर का भ्रमण कर एनइपी के क्रियान्वयन से जुड़े विविध कार्यों और गतिविधियों को देखा। सबने विद्यालय के शिक्षण और उससे जुड़े क्रियाकलाप की सराहना की।

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