Malinga ODI Records: वनडे में 338 विकेट
स्लिंग एक्शन, घातक यॉर्कर और मैच का रुख बदल देने वाली गेंदबाजी ने लसिथ मलिंगा को क्रिकेट इतिहास के महानतम तेज गेंदबाजों में शामिल किया। 2021 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी उनका प्रभाव नई पीढ़ी के गेंदबाजों पर कायम है।
मलिंगा
ने 26
जुलाई 2019 को कोलंबो के आर. प्रेमदासा
स्टेडियम में बांग्लादेश के खिलाफ अपना आखिरी वनडे खेला था। श्रीलंका ने यह
मुकाबला 91 रन से जीता और मलिंगा ने अपने विदाई वनडे में 38
रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने अपने आखिरी वनडे में आखिरी गेंद पर
विकेट लेकर अपने एकदिवसीय करियर का शानदार अंत किया।
लेकिन
मलिंगा की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट में खेलना जारी रखा और मार्च 2020 में वेस्टइंडीज के
खिलाफ अपना आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। इसके बाद 14
सितंबर 2021 को उन्होंने सभी तरह के क्रिकेट
से संन्यास की घोषणा कर दी।
मलिंगा
ने 226
वनडे मैचों में 338 विकेट लिए। अपने अंतिम
वनडे में उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ तीन विकेट लेकर श्रीलंका को 91 रन की जीत दिलाई। उस समय वह वनडे क्रिकेट में भारत के महान गेंदबाज अनिल
कुंबले के 337 विकेट को पीछे छोड़कर सर्वाधिक विकेट लेने
वाले गेंदबाजों की सूची में नौवें स्थान पर पहुंच गए थे।
उनके
वनडे करियर की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ विकेटों की संख्या नहीं,
बल्कि अहम मौकों पर विकेट लेने की क्षमता थी। नई गेंद से गेंदबाजी
हो या पारी के आखिरी ओवर, मलिंगा अपनी गति और विविधता से
बल्लेबाजों के लिए चुनौती बने रहे।
2021
में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास
वनडे
और टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके मलिंगा ने सितंबर 2021
में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से भी विदाई
ले ली। इसके साथ उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर पूरी तरह समाप्त हो गया।
आईसीसी
के अनुसार मलिंगा ने श्रीलंका के लिए 30 टेस्ट,
226 वनडे और 84 टी20 अंतरराष्ट्रीय
मैच खेले और तीनों प्रारूपों में कुल 546 विकेट लिए।
तीनों प्रारूपों में मलिंगा का प्रदर्शन
|
प्रारूप |
मैच |
विकेट |
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन |
|
टेस्ट |
30 |
101 |
5/50 |
|
वनडे |
226 |
338 |
6/38 |
|
टी20 अंतरराष्ट्रीय |
84 |
107 |
5/6 |
|
कुल |
340 |
546 |
— |
यही
आंकड़े बताते हैं कि मलिंगा का प्रभाव किसी एक प्रारूप तक सीमित नहीं था।
वनडे में तीन हैट्रिक लेने वाले इकलौते गेंदबाज
लसिथ
मलिंगा के नाम वनडे क्रिकेट का एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे
हासिल करना बेहद मुश्किल है। वह वनडे क्रिकेट में तीन हैट्रिक लेने वाले दुनिया के
इकलौते गेंदबाज हैं।
उन्होंने
2007
में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, 2011 में केन्या
के खिलाफ और उसी विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैट्रिक ली थी। आईसीसी के
अनुसार इनमें से दो हैट्रिक 2011 विश्व कप में आई थीं।
चार गेंदों में चार विकेट: क्रिकेट इतिहास का ऐतिहासिक
पल
28
मार्च 2007 का दिन मलिंगा के करियर का सबसे
यादगार दिन माना जाता है। वेस्टइंडीज में खेले गए विश्व कप मुकाबले में दक्षिण
अफ्रीका जीत के बेहद करीब थी। उसे जीत के लिए सिर्फ चार रन चाहिए थे और उसके हाथ
में पांच विकेट बाकी थे।
तभी
मलिंगा ने लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लेकर मुकाबले का रुख ही बदल दिया। वह
क्रिकेट इतिहास में वनडे में चार गेंदों पर चार विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने।
हालांकि
दक्षिण अफ्रीका अंततः एक विकेट से मैच जीत गया, लेकिन
मलिंगा का वह स्पेल क्रिकेट इतिहास में अमर हो गया।
यॉर्कर को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत
मलिंगा
की पहचान उनकी घातक यॉर्कर से बनी। उनकी गेंदबाजी का एक्शन पारंपरिक तेज गेंदबाजों
से बिल्कुल अलग था। गेंद छोड़ते समय उनका हाथ नीचे से तेजी से आता था,
जिसके कारण बल्लेबाजों के लिए गेंद की लंबाई को भांपना मुश्किल होता
था।
उन्होंने
यॉर्कर के साथ स्लोअर गेंद और गति में बदलाव को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया।
खासकर डेथ ओवरों में उनकी यही विविधता उन्हें खतरनाक बनाती थी। आईसीसी के अनुसार
मलिंगा ने खुद बताया था कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी में विविधता पर अतिरिक्त मेहनत
की और थकान के बाद भी गेंदबाजी कौशल को निखारने पर जोर दिया।
2014
टी20 विश्व कप में कप्तान के रूप में रचा
इतिहास
मलिंगा
की कप्तानी में श्रीलंका ने 2014 में बांग्लादेश में
आयोजित आईसीसी टी20 विश्व कप जीता था।
फाइनल
में श्रीलंका ने भारत को छह विकेट से हराकर पहली बार टी20
विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। मलिंगा ने उस टीम को सिर्फ गेंद
से ही नहीं, बल्कि मैदान पर अपनी रणनीति और नेतृत्व से भी
मजबूती दी।
आईपीएल में भी छोड़ी गहरी छाप
अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट के अलावा मलिंगा ने दुनिया की प्रमुख टी20 लीगों
में भी अपनी पहचान बनाई। विशेष रूप से मुंबई इंडियंस के साथ उनका रिश्ता बेहद सफल
रहा।
मुंबई
इंडियंस के लिए उन्होंने डेथ ओवरों में कई महत्वपूर्ण मुकाबले जिताए। 2019
आईपीएल फाइनल इसका बड़ा उदाहरण है, जब चेन्नई
सुपर किंग्स के खिलाफ आखिरी ओवर में गेंदबाजी करते हुए उन्होंने मुंबई इंडियंस को
एक रन से रोमांचक जीत दिलाई। आईसीसी ने भी उस मुकाबले में मलिंगा की अंतिम गेंद और
स्लोअर गेंद के इस्तेमाल को खास तौर पर रेखांकित किया था।
संन्यास के बाद भी क्रिकेट से रिश्ता कायम
मलिंगा
ने 2021
में सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास जरूर ले लिया, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ। उन्होंने युवा गेंदबाजों को
मार्गदर्शन देने और कोचिंग की भूमिका में काम करना जारी रखा।
दिसंबर
2025
में श्रीलंका क्रिकेट ने उन्हें 2026 टी20
विश्व कप की तैयारियों के लिए कंसल्टेंट फास्ट-बॉलिंग कोच के रूप
में अल्पकालिक आधार पर जोड़ा था। यह भूमिका 15 दिसंबर 2025
से 25 जनवरी 2026 तक के
लिए थी।
इससे
साफ है कि मलिंगा का अनुभव अब मैदान पर गेंदबाजी करने के बजाय नई पीढ़ी के
गेंदबाजों को तैयार करने में काम आ रहा है।
युवा गेंदबाजों के लिए मलिंगा का सबसे बड़ा संदेश
मलिंगा
के करियर को देखा जाए तो उनकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ गति नहीं थी। उन्होंने अपनी
तकनीक को अपनी अलग पहचान बनाया।
उनकी
कहानी युवा खिलाड़ियों को यह संदेश देती है कि अगर आपकी शैली दूसरों से अलग है तो
उसे कमजोरी मानने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया जा सकता है।
2019
में अपने अंतिम वनडे के बाद मलिंगा ने युवा खिलाड़ियों से मैच
विजेता बनने की अपील की थी। उनका मानना था कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए
खिलाड़ी को ऐसे मौकों पर प्रदर्शन करना चाहिए, जब टीम को
उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो।
लसिथ मलिंगा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आंकड़े
टेस्ट क्रिकेट
- मैच:
30
- विकेट:
101
- सर्वश्रेष्ठ
गेंदबाजी: 5/50
- पांच
विकेट: 3 बार
वनडे क्रिकेट
- मैच:
226
- विकेट:
338
- सर्वश्रेष्ठ
गेंदबाजी: 6/38
- पांच
विकेट: 8 बार
- हैट्रिक:
3
टी20 अंतरराष्ट्रीय
- मैच:
84
- विकेट:
107
- सर्वश्रेष्ठ
गेंदबाजी: 5/6
- पांच
विकेट: 2 बार
- हैट्रिक:
2
तीनों प्रारूप
- कुल
मैच: 340
- कुल
विकेट: 546
ये
आंकड़े आईसीसी के उपलब्ध करियर रिकॉर्ड से मेल खाते हैं।
मलिंगा की विरासत: क्रिकेट से कहीं आगे
लसिथ
मलिंगा ने क्रिकेट में सिर्फ विकेटों के आंकड़े नहीं छोड़े। उन्होंने तेज गेंदबाजी
की एक ऐसी शैली को लोकप्रिय बनाया, जिसमें
पारंपरिक तकनीक से अलग होकर भी विश्वस्तरीय सफलता हासिल की जा सकती है।
उनका
स्लिंग एक्शन, घातक यॉर्कर, डेथ
ओवरों की गेंदबाजी और दबाव में विकेट लेने की क्षमता आज भी उन्हें क्रिकेट इतिहास
के सबसे अलग तेज गेंदबाजों में शामिल करती है।
2026
में जब नई पीढ़ी के तेज गेंदबाजों की बात होती है, तो मलिंगा की गेंदबाजी की विरासत अब भी दिखाई देती है। मैदान से संन्यास
लेने के वर्षों बाद भी उनका क्रिकेटिंग प्रभाव कायम है—और शायद यही किसी महान
खिलाड़ी की सबसे बड़ी पहचान होती है।
Read in english
Lasith Malinga: The Yorker Wizard and His Extraordinary Cricketing Journey



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