1 हार-जीत का रास्ता तय करेगा तीसरा चरण | jharkhand assembly election 2019 - the opinion times

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हार-जीत का रास्ता तय करेगा तीसरा चरण | jharkhand assembly election 2019

झारखंड विधानसभा चुनाव 2०19
 झारखंड विधानसभा 2०19 के तीसरे चरण का चुनाव 12 दिसंबर यानि गुरूवार को होगा। चुनाव के लिए प्रचार अभियान भी थम गया है। दो चरणों का चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न तो गया और तीसरे चरण के चुनाव को भी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्राासन और सुरक्षा बलों ने पूरी तरह से कमर कस ली है, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढè रहा है, राजनीतिक तौर पर सरगर्मी भी तेज होती जा रही है। राज्य में होने वाले इस तीसरे चरण के चुनाव को हार-जीत के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसीलिए प्रत्यााियों के साथ-साथ राज्य के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है, जिनमें राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास, विपक्षी नेता हेमंत सोरेन, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, आजसू नेता सुदेा महतो आदि शामिल हैं, क्योंकि आखिरकार हार-जीत का ठीकरा इन्हीं के सिर पर होगा। जो दिग्गज इस चरण में चुनाव मैदान में हैं, उनमेंं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुदेा महतो, मंत्री नीरा यादव, सीपी सिंह व कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले मनोज यादव जैसे दिग्गज शामिल हैं। इस तीसरे चरण में 17 सीटों के लिए मतदान होगा। आइए कुछ महत्वपूर्ण सीटों के समीकरणों पर नजर डालते हैं।
 कोडरमा विधानसभा सीट 
 यह सीट चुनावी फाइट के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भले ही, यहां की परिस्थिति इस बार बदली हुईं हैं, लेकिन राजनीतिक घेराबंदी के लिहाज से यह सीट खास मानी जा रही है। यह सीट ािक्षा मंत्री नीरा यादव के चुनाव मैदान में होने से खास तो है ही, बल्कि भाजपा की बागी शालिनी गुप्ता के चुनाव मैदान में होने से भी खास मानी जा रही है, क्योंकि शालिनी गुप्ता जिला कोडरमा की जिला परिषद् की सदस्य भी हैं। उधर, आजसू ने भी प्रत्यााी खड़ा कर दिया है। आजसू का भी इस बार भाजपा से गठबंधन टूट चुका है। इसीलिए वोट बंटने की स्थिति में बीजेपी खेमे को चुनौती का सामना करना पड़ेगा। पिछले चुनाव में राजद से अन्नपूर्णा देवी चुनाव हार गईं थीं, लेकिन अब वह भाजपा से सांसद हैं।
2०14 के चुनाव में अन्नपूर्णा देवी के चुनाव मैदान में होने की वजह से भाजपा प्रत्यााी नीरा यादव को बहुत अधिक बढèत नहीं मिली थी। पहले व दूसरे नंबर पर महज 7 फीसदी का ही अंतर था। इस चुनाव में राजद प्रत्यााी अमिता कुमार भी अपनी राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए जी-तोड़ कोािा कर रहे हैं। खासकर, परंपरागत वोटों को बचाने के लिए। इसके अतिरिक्त जातीय समीकरणों को भी स्वयं से जोड़े रखना प्रत्यााियों के लिए आसान नहीं होगा। 2०14 चुनावों की बात करें तो यहां कुल 3 लाख 276 मतदाता थे, लेकिन मतदान 1 लाख 97 हजार 978 लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया। वोटिंग का प्रतिात 65.93 था। जीत हासिल करने वाली भाजपा प्रत्यााी डा. नीरा यादव को 84 हजार 874 वोट मिले थे, जबकि राजद प्रत्यााी अन्नपूर्णा देवी को 71 हजार 349 वोट मिले थे। 
 सिल्ली विधानसभा सीट
 सिल्ली बंपर मतदान होने के लिए जाने जानी वाली सीट है, लेकिन इस बार इस सीट पर प्रतिद्बंद्बिता बहुत अधिक है। कई प्रतिद्बंद्बी चुनाव मैदान में हैं। इस बार यहां आजसू अध्यक्ष सुदेा महतो के लिए चुनौती कम नहीं है। पिछले चुनाव में हार-जीत का गैप अधिक होने की वजह से सुदेा महतो के लिए इसे पाटना आसान नहीं होगा। ग्रामीण वोटरों के बाहर निकलने की वजह से यहां पिछले चुनाव में 77.66 फीसदी मतदान हुआ था और हार-जीत का अंतर 21.19 फीसदी था। यहां जातीय समीकरण होने की वजह से किसी भी प्रत्यााी के लिए सीट निकालना बड़ी चुनौती साबित होगी। आजसू अध्यक्ष सुदेा महतो के अलावा सीमा, सुदेा और उमेा चुनाव मैदान में हैं। 2०14 विधानसभा चुनाव की बात करें तो कुल 1 लाख 84 हजार 393 मतदाता था, लेकिन 1 लाख 43 हजार 2०5 लोगों ने मतदान किया। झामुमो प्रत्यााी अमित कुमार जीते थे और उन्हें 79 हजार 747 वोट उन्हें मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे सुदेा महतो को 5० हजार 7 वोट प्राप्त किए थे। 
 बरही विधानसभा सीट
 बरही विधानसभा सीट भी मजबूत फाइट के लिए जानी जाती है। दल बदलू लोग इस बार यहां से चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस के विधायक मनोज यादव इस बार यहां बीजेपी से प्रत्यााी हैं, जबकि बीजेपी छोड़कर उमाांकर अकेला इस बार यहां कांग्रेस से प्रत्यााी हैं। उमाांकर अकेला 2००9 में भाजपा के विधायक थे। इसीलिए इस बार इन दोनों दल बदलू प्रत्यााियों के बीच कड़ी फाइट होने वाली है। झाविमो की तरफ से इस बार अरविंद उपाध्याय इस बार चुनाव मैदान में हैं। 2०14 विधानसभा चुनाव परिणामों की बात करें तो यहां 2 लाख 62 हजार 939 मतदाता थे, जबकि 1 लाख 74 हजार 5०3 मतदाताओं ने मतदान किया था। कांग्रेस से प्रत्यााी रहे मनोज यादव ने 57 हजार 818 वोट प्राप्त की जीत हासिल की थी। वहीं, भाजपा से प्रत्यााी रहे उमाांकर को 5० हजार 733 वोट मिले थे। 
 धनवार विधानसभा सीट
 झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी के चुनाव मैदान में होने की वजह से धनवार विधानसभा सीट का चुनाव इस बार खास होने जा रहा है। इसीलिए यहां राजनीतिक सरगर्मी चरम पर देखने को मिल रही है। पिछले चुनाव में बाबूलाल मरांडी यहां से चुनाव हार गए थे। पर इस बार उम्मीद के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। फिर कई दिग्गजों के चुनाव मैदान में होने और जातीय समीकरणों के चलते बाबूलाल मरांडी की चुनौती कम नहीं दिखाई दे रही है। झाविमो, माले को झामुमो और निर्दलीय प्रत्यााियों के वोटरों की गोलबंदी का डर है। भाजपा प्रत्यााी लक्ष्मण सिंह भी यहां खूब पसीना बहा रहे हैं। वह कैडर्स के भरोसे इस सीट पर चुनावी समीकरण बदलने में जुटे हुए हैं। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्यााी के रूप में अनूप संथालिया के चुनाव मैदान में आने से वोटों के बंटवारे की उम्मीद जताई जा रही है। इस सीट पर 2०14 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो तब कुल मतदाताओं की संख्या 2 लाख 77 हजार 622 थी, जबकि 1 लाख 76 हजार 689 मतदाताओं ने मतदान किया था और वोटिंग का कुल प्रतिात 63.64 रहा था। माले से राजकुमार यादव ने 5० हजार 634 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी, जबकि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो प्रत्यााी बाबूलाल मरांडी 3० हजार 922 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। 
 रांची विधानसभा सीट 
 रांची विधानसभा सीट का चुनाव हमेाा से ही हॉट माना जाता रहा है, हालांकि यह बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है। विपक्ष पुरजोर कोािा कर रहा है कि कैसे बीजेपी से यह उसकी परंपरागत सीट को छीना जाए। बीजेपी की तरफ से इस सीट पर मंत्री सीपी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि महागठबंधन की तरफ से महुआ माजी चुनाव मैदान में हैं। विपक्षी नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को उनके खराब कार्यों का हवाला देकर चौतरफा घेरे हुए हैं। इसके अलावा पूर्व चेंबर अध्यक्ष पवन शर्मा भी राजधानी की इस सीट पर नजर गड़ाए हैं, इसीलिए इस सीट पर भी कड़ी फाइट होने की उम्मीद है। पवन शर्मा निर्दलीय प्रत्यााी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। 2०14 चुनावों के दौरान यहां 3 लाख 5 हजार 969 मतदाताओं में से 1 लाख 48 हजार 784 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। भाजपा प्रत्यााी सीपी सिंह ने 96 हजार 76० वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी, जबकि झामुमो प्रत्यााी महुआ माजी 36 हजार 897 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। 
मांडू विधानसभा सीट
 मांडू विधानसभा सीट का चुनाव इस बार दो सगे भाइयों जय प्रकाा पटेल और रामप्रकाा पटेल के चुनाव मैदान में होने से दिलचस्प होने जा रहा है। जयप्रकाा पूर्व मंत्री हैं, जो 2०14 का विधानसभा चुनाव झामुमो के प्रत्यााी के रूप में जीते थे। जय प्रकाा सिंह इस बार भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि इनके बड़े भई राम प्रकाा को झामुमो ने अपना प्रत्यााी बनाया है। यहां बता दें कि इन दोनों के पिता टेकलाल महतो झामुमो के सीनियर नेता थे। इस सीट पर भाजपा के बागी प्रत्याशी कुमार महेा सिंह के अलावा आजसू के तिवारी महतो भी चुनाव मैदान में हैं। 2०14 की बात करें तो इस सीट पर 3 लाख 53 हजार 669 मतदाता थे, जिसमें से 2 लाख 28 हजार 34० मतदाताओं ने अपना वोट दिया था। झामुमो से जेपी पटेल ने 78 हजार 499 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। उस वक्त भाजपा के प्रत्यााी रहे महेश सिंह के पाले में 71 हजार 487 वोट आए थे। 
रामगढ विधानसभा सीट
 इस सीट पर इस बार नए प्रत्यााी चुनाव मैदान में हैं, जिसमें पूर्व मंत्री चंद्र प्रकाा चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी चुनाव मैदान में हैं। आजसू-भाजपा गठबंधन टूटने का असर इस विधानसभा सीट पर दिख रहा है। लंबे अंतर से जीतने के बावजूद इस सीट पर विपक्षी घेराबंदी तोड़ने की कोशिश आजसू कर रही है। यहां कांग्रेस से ममता देवी, तो भभाजपा के कुंटू बाबू (रनंजय कुमार) से चुनौती मिल रही है, इसके बीच में पूर्व मंत्री की छवि और पकड़ के भरोसे आजसू नैया पार करना चाह रही है। 2०14 के विधानसभा चुनाव में यहां 2 लाख 85 हजार 285 मतदाता थे, जिसमें से 2 लाख ०1 हजार 755 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। आजसू के प्रत्यााी चंद्र प्रकाा यहां से जीते थे, जिन्हें 98 हजार 987 वोट मिले थे। कांग्रेस से प्रत्यााी रहे शहजादा अनवर को 45 हजार 169 वोट हासिल हुए थे।

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